Monday, 27 October 2014

 दास्ताने आजादी: तस्वीरों के जरिये 

 इन दिनों बैंगलोर के नेशनल गैलरी ऑफ़ मॉडर्न आर्ट में 'विजुअल आर्काइव ऑफ़ कुलवंत रॉय' नामक एक प्रदर्शनी चल रही है जिसमें फोटो जर्नलिस्ट कुलवंत रॉय द्वारा सन १९३० से १९७० के मध्य खींची गयी दुर्लभ तस्वीरों को लगाया गया है। तक़रीबन ३०० तस्वीरों से सजी इस प्रदर्शनी की एक-एक तस्वीर गुलाम भारत की लाचारियों और स्वतंत्र भारत की उम्मीदों को बयां करती है जिसे हमने किताबों और कहानियों में पढ़ा है।
तक़रीबन ५ दशकों की कई खट्टी -मीठी यादों को सहेजे ये तस्वीरें भारतीय स्वाधीनता आंदोलन के महत्वपूर्ण दस्तावेज भी है, चाहे वह १९४२ के क्रिप्स मिशन की तस्वीरें हो या शिमला कैबिनट मिशन की या फिर महात्मा गांधी और फ्रंटियर  गांधी की नॉर्थ वेस्ट फ्रंटियर प्रोविंस में हुई मुलाकात की तस्वीर।भारतीय स्वाधीनता आंदोलन के इन महत्वपूर्ण क्षणों को देखना एक अनोखा अनुभव है. 
विभिन्न रैलियां को सम्बोधित करते गांधी, रेलवे के तीसरे दर्ज़े में यात्रा करते गाँधी,नेहरू और पटेल के साथ मंत्रणा में व्यस्त गांधी और जिन्ना के साथ विचार- विमर्श करते गांधी की तस्वीरें अतीत को जीवंत कर उठी है. 

इन तस्वीरों के माध्यम से स्वतंत्र भारत के समक्ष चुनौतियाँ को भी देखा और महसूस किया जा सकता है। संविधान पर हस्ताक्षर करते प्रमुख नेतागण, पटेल की विभिन्न देसी रियासतों के महाराजाओं से मुलाकात या पाकिस्तान युद्ध के वक्त सीमा पे लड़ते जवानों का हौसला देखना अत्यंत रोमांचक है.

 इन गंभीर मसलों के अलावा कुछ हलके- फुल्के क्षणों को भी कुलवंत रॉय ने उतनी ही खूबसूरती  से अपने कैमरे में कैद किया है यथा बिरला हाउस में लंच के बाद हाथ धोते नेहरू, अपने नाती राजीव गांधी को दुलारते नेहरू, बहन विजय लक्ष्मी पंडित के गले मिल रहे नेहरू या एक क्रिकेट मैच के दौरान बल्ले को थामे नेहरू। राजनीति का पाठ सीखती इंदिरा गांधी की तस्वीरें भी इस प्रदर्शनी  का हिस्सा बनी है.

तस्वीरों के अलावा यहाँ महत्वपूर्ण पोस्टकार्ड, समाचारपत्रों की मौलिक प्रतियाँ भी देखी जा सकती है. हॉल के बीचों-बीच रखे कैमरे को देखना भी सुखद है जो इन महत्वपूर्ण दस्तावेजों का जरिया बना.

आजादी मिलने के तत्पश्चात कुलवंत रॉय के विदेश भ्रमण की तस्वीरें भी यहाँ लगाई गयी है जिसमें तत्कालीन विश्व की झलकियाँ मिलती है .स्वंतत्रता आंदोलन के अलावा भारत के कई महत्वपूर्ण स्थलों की तस्वीरें भी आकर्षित करती है मसलन अमरनाथ की कठिन यात्रा पर जाते लोग और भाखरा-नांगल बाँध की विशालता।

 इस बेमिसाल फोटो संग्रह को सहेजा और आम जनता के समक्ष प्रस्तुत किया है, आदित्य आर्या ने जो कुलवंत रॉय के निकट सम्बन्धी भी हैं।
The crates stacked with old photographs were lying in one corner of renowned advertising photographer Aditya Arya’s house for almost 24 years. He finally opened them one day, and he was surprised to find a treasure—numerous photographs that reflected key moments in India’s history of independence. It was unimaginable that a long forgotten photojournalist from the pre-independence period clicked these pictures. This photographer was Arya’s uncle, Kulwant Roy. Roy’s images are a documentation of India during the pre- as well as postindependence eras. He has managed to capture raw emotions and crucial events that emerged from the Indian political movements. One is easily transported into these eras and swayed by the moments frozen into each of these frames. - See more at: http://betterphotography.in/perspectives/great-masters/kulwant-roy/12313/#sthash.AHRQdXPq.dpuf
The crates stacked with old photographs were lying in one corner of renowned advertising photographer Aditya Arya’s house for almost 24 years. He finally opened them one day, and he was surprised to find a treasure—numerous photographs that reflected key moments in India’s history of independence. It was unimaginable that a long forgotten photojournalist from the pre-independence period clicked these pictures. This photographer was Arya’s uncle, Kulwant Roy. Roy’s images are a documentation of India during the pre- as well as postindependence eras. He has managed to capture raw emotions and crucial events that emerged from the Indian political movements. One is easily transported into these eras and swayed by the moments frozen into each of these frames. - See more at: http://betterphotography.in/perspectives/great-masters/kulwant-roy/12313/#sthash.AHRQdXPq.dpuf






                                                       

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