Tuesday, 13 February 2018

मुख्यमंत्रीजी का आगमन


कुछ दिन पहले लाउडस्पीकर से की जा रही एक घोषणा सुनाई दी. आवाज स्पष्ट न थी, पर अनुमान लगा कि शायद किसी राज्य के मुख्यमंत्री यहाँ किसी गार्डन में आम जनता को सम्बोधित करने वाले हैं. अक्सर ऐसा होता है, वर्तमान की कोई घटना, कुछ आवाजें या बस कोई खुशबू सहसा ही हमें अतीत की कुछेक घटनाओं की याद दिलाती है और सबकुछ चलचित्र की भांति हमारे सामने घूम जाता है.

करीब २२-२३ वर्ष पहले मिली ऐसी ही एक खबर पर अनायास ही ध्यान चला गया.. सूचना के मुताबिक राज्य के तत्कालीन मुख्यमंत्रीजी की हमारे गांव में पधारने की योजना बनी थी. सूचना मिलने के कुछ ही दिनों के अंतराल में निरीक्षण के लिए आये-दिन आने वाली  सरकारी अफसरों  की गाड़ियों ने इस समाचार को बिलकुल पुख्ता ही कर दिया था. चारों तरफ इसी की चर्चा थी. दूसरे अन्य गाँवों तक खबर फैलते देर न लगी. गांव का इतिहास खंगाला जाने लगा कि कब अंतिम दफा यहाँ ऐसे ही किसी अन्यमहापुरुष के चरण यहाँ की धरती पर पड़े हों! दिन नजदीक आते ही निर्धारित स्थान पर बॉस बल्लों का ढेर लग गया. मंच, जिस पर खड़े होकर मुख्यमंत्रीजी आम जन को सम्बोधित करने वाले थे, का ढांचा तैयार हुआ, VIP अतिथियों के लिए विशेष व्यवस्थायें की जा रही थी.  जैसे- जैसे समय नजदीक आ रहा था, सम्पूर्ण इलाके में उत्सव जैसा माहौल छाने लगा था . ऊपर से मुख्यमंत्री महोदय के हेलीकॉप्टर से आने की सूचना से  तो लोगों की उत्सुकता और बढ़ गयी थी. युद्धस्तर पर एक हेलिपैड बनने का काम भी शुरू हो चला था। सुनने में आया कि इंतज़ाम के लिए मिली राशि का भारी दुरूपयोग भी हुआ, पर बेशक ज्यादातर लोग निस्वार्थभाव से ही मुख्यमंत्री के आने का इंतज़ार कर रहे थे ☺. दूर -दराज इलाकों से भारी संख्या में लोग भी आकर मुआयना करने पहुँचने लगे।  अंदाजा होने लगा था की उस दिन मेले जैसी भीड़ जुटने वाली है और हुआ भी वैसा ही, बड़े बूढ़ों का कहना था कि ऐसी भीड़ इस गांव में कभी न देखी थी! विजयादशमी के मेले में भी इतनी भीड़ कभी न जुटी थी.

  अब जब ऐसा सुअवसर आ ही रहा था तब हमारे विद्यालय के शिक्षकों ने मिलकर भी बहती गंगा में हाथ धोने का निर्णय ले लिया कि वर्षों से उपेक्षित पड़े इस विद्यालय की सारी समस्याओं को एक चिट्ठी में लिखकर मुख्यमंत्री जी को सौंप देंगे. वैसे भी, चरवाहा विद्यालय की स्थापना करके शिक्षा के क्षेत्र में क्रांतिकारी परिवर्तन लाकर  दुनिया भर को हैरान करने वाले के समक्ष इन छोटी-मोटी समस्याओं  की क्या बिसात ?अब काहे की देर, लग गया पूरा विद्यालय बढ़िया से बढ़िया कंटेंट वाली चिट्ठी लिखने में. २-३ दिन के अंदर एक लम्बा- सा शिकायती पत्र भी बना लिया गया.  टूटी हुई छप्परों, बेंचों की कमी , प्रयोगशाला और पुस्तकालय  का अभाव, पीने का पानी और शौचालय के न होने से उत्पन्न परेशानियों का उल्लेख कर, दया-दृष्टि फेरने का आग्रह कर दिया गया. भव्य स्वागत के लिए एक स्वागत गान  गाने की योजना बनी. बस, सारा स्कूल तैयारी में जुट गया. कई स्वागत गानों में से एक स्वागत  गान का चुनाव किया गया और धुआंधार प्रैक्टिस शुरू हो गई। साथ ही, रोज पत्र का आकलन भी किया जाता, कुछ शिकायतें काटी जाती, कुछ जोड़ी जाती। महामहिम के आतिथ्य-सत्कार में कोई कमी न रह जाए, इस पर पूरा ध्यान दिया जा रहा था☺ हालिया सर्वेक्षण के हिसाब से शिक्षा के स्तर में गिरावट के समाचार मिले हैं, और कितनी गिरावट, अंदाज लगाना मुश्किल है.
खैर, जैसे राम का स्पर्श पा देवी अहिल्या वर्षों के श्राप से मुक्त हो पायी थी, वैसे ही कुछ चमत्कार की आशा बांधे हमसब उस पावन दिन का बेसब्री से इंतज़ार करने लगे.
आ ही गया वो दिन। एक-डेढ़ घंटे के ही बिलम्व के बाद ही हेलीकॉप्टर की गड़गड़ाहट ने दूर से ही उनके आने की सूचना दी और लोगों का हुजुम उनकी जय-जयकार करते दौड़ पड़ा मुख्मंत्रीजी की झलक पाने।
तेज कदमों के साथ अपने सहयोगियों से घिरे मुख्यमंत्री महोदय जी मंच पर पहुंचे। माला वगैरह पहनने की औपचारिकताओं के पश्चात स्वागत गान के साथ उनका स्वागत किया गया. तत्पश्चात बारी आई, कई दिनों की मेहनत के बाद लिखेहुए शिकायती पत्र उनके हाथों में थमा देने की. उनके एक सहयोगी ने अपने हाथ में लेकर पत्र के साथ-साथ हमारी आशाओं को भी कहीं बगल में सरका दिया था. किन बातों को कितनी गम्भीरता से ली जाए, इतनी समझ बच्चों में कहाँ ? तमाम औपचारिकताओं की सम्पन्नता के बाद मुख्यमंत्रीजी ने चिरपरिचित अंदाज में बोलना शुरू किया. हमारी समझ से परे मगर लोटपोट कर देने वाला भाषण था, ढेर सारी  तालियां मिली, खूब मनोरंजन हुआ। मंच पर एक व्यक्ति को इशारे से बुलाकर उसकी पसलियां गिनने लगे, लगा कि अपनी पैनी नजर से उस बेचारे गरीब के सारे दुख दर्द ताड़ गए हों! कुछ उम्मीदें बंधाई, कुछ  वादे किये।अब समय हो चला था, अपने हेलीकॉप्टर में बैठ कर चल पड़े किसी और सभा को सम्बोधित करने ..






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