Tuesday, 25 February 2020

नेशनल साइंस डे



अमूमन 'विज्ञान' शब्द सुनते ही कईयों के ज़ेहन में आता है, या तो कठिन-सा कुछ या फिर उबाऊ सी बात। पर, इस बात से सहमति भी होती है कि हमारे रोजमर्रा की ज़िन्दगी के अधिकांश पहलूओं से जुड़ा है विज्ञान। छोटी सी सूई से लेकर हवाई जहाज तक या फिर बिजली, मोबाइल, कार से लेकर अंतरिक्ष तक! निसंदेह कई गुत्थियों के सुलझाने, हमारे जीवन शैली में बदलाव लाने और भविष्य में प्रकृति के कई अन्य रहस्यों को ढूंढने में इंसानों को हौसला प्रदान करने में विज्ञान की अहम् भूमिका से इंकार नहीं किया जा सकता।
फिर, विज्ञान से इतनी दूरी क्यों? क्यों न आम जान खासकर बच्चों को इसके और करीब लाने का प्रयत्न किया जाये, विज्ञान से परिचय कराया जाए, विज्ञान को और अधिक लोकप्रिय बनाया जाये! इसी आशय के साथ भारत में प्रत्येक वर्ष २८ फरवरी को नेशनल साइंस डे मनाया जाता है। सन १९८७ से शुरू हुई इस परंपरा को विज्ञान से जुड़े लोग या फिर विज्ञान में रूचि रखने वाले उत्सव की तरह मनाते हैं। इस दिन वैज्ञानिक संस्थानों, प्रयोगशालाओं, स्कूल- कॉलेजों तथा प्रशिक्षण संस्थानों में वैज्ञानिक गतिविधियों से संबंधित कार्यक्रमों का आयोजन आम लोगों को विज्ञान के हमारे जीवन में अहमियत से अवगत कराने और विज्ञान के प्रति आकर्षित करने, विद्यार्थियों को विज्ञान के क्षेत्र में नए प्रयोगों के लिए प्रेरित करने तथा विज्ञान एवं वैज्ञानिक उपलब्धियों के प्रति सजग बनाने के उद्देश्य से किया जाता है। समाज में वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा देना और देश में विज्ञान के निरंतर उन्नति की दिशा में काम करने का संकल्प लेना ऐसे कार्यक्रमों का मूल उद्देश्य है।
ज्यादा से ज्यादा लोगों को इस कार्यक्रम से जोड़ पाने के उद्देश्य से २८ फरवरी (शुक्रवार) की जगह गत रविवार को ऐसा ही एक आयोजन टीआईएफआर कोलाबा मुंबई कैंपस में आयोजित किया गया। एक बेहतरीन मौका, वहां के वैज्ञानिकों के सानिध्य में विज्ञान से सम्बंधित कुछ सिद्धांतों को समझना और उनके द्वारा किये जा रहे नवीनतम अनुसंधानों के बारे में जानकारी हासिल करना।कंजरवेशन ऑफ़ एंगुलर मोमेंटम (कोणीय संवेग का संरक्षण का नियम) जैसे सिद्धांत को एक साइकिल के पहिये के साथ साबित करने या फिर कॉरिऑलिस प्रभाव (वस्तुतः पृथ्वी के विभिन्न अक्षांशों में परिधि का आकार तथा केंद्र से दूरी के कारण पृथ्वी की घूर्णन गति भिन्न भिन्न होती है। इस गति-भिन्नता के कारण कोई भी गतिमान वस्तु जो एक अक्षांश से दूसरे अक्षांश की ओर गतिमान होती है, उस पर यह बल कार्य करने लगता है। कोरिऑलिस बल के कारण उत्तरी गोलार्द्ध में वायु की गति की दिशा के दाएं ओर तथा दक्षिणी गोलार्द्ध में गति की दिशा के बाईं ओर बल लगता है) को सरल अंदाज में दर्शकों को बताने के प्रयास को लोगों ने खूब सराहा।
वैज्ञानिक अभिरुचि के प्रसार के लिए वैज्ञानिकों और आम लोगों के बीच की दूरियों को कम किया जाना निहायत जरूरी है। इसके लिए जरूरी है कि वैज्ञानिक लोगों के करीब जाएँ और उनके साथ संवाद करें, उनकी जिज्ञासाओं का समाधान करें। यही प्रयास उस दिन कैंपस में जगह- जगह लगे टेंटों में बने अस्थायी रूप से बनाये गए प्रयोगशालाओं में साफ़ दिखाई दे रहा था। उत्साही बच्चे-बड़ों को छोटे छोटे प्रयोगों से विषय की बारीकियों को धैर्य के साथ समझाते वालंटियर्स और वालंटियर्स के काले टीशर्ट पर छपी सर सी वी रमण द्वारा कही गयी एक प्रसिद्ध पंक्ति "Ask the right questions, and nature will open the doors to her secrets, दर्शकों को सवाल करने को प्रोत्साहित करते!
कहीं लार्वा के बर्तावों को समझा जा रहा है, कहीं वेदर मशीन के बारे में बताया जा रहा है, कहीं लिक्विड नाइट्रोजन के साथ किये जा रहे अजीबो-गरीब प्रयोग दिखाए जा रहे हैं, कहीं लाइन फॉलोइंग रोबोट को बनाने सम्बन्धी निर्देश दिए जा रहे हैं, या फिर आर्डुइनो की सहायता से कुछ गेम्स को बनाने की तकनीक बताई जा रही है. अपनी रूचि के हिसाब से विषय चुनने की पूरी आज़ादी। कहीं पत्थरों के बारे में जानकारी दी जा रही है और कहीं गणित से सम्बंधित पज़ल्स को हल करने की चुनौती है! आर्कमेडियन सॉलिड्स, धरती के भिन्न- भिन्न परतों, सूर्य की संरचना इत्यादि के बारे में बताते रंग-बिरंगे पोस्टर्स हमें आकर्षित कर रहे हैं और साथ में हैं विस्तार से समझाने के लिए आतुर वालंटियर्स..
इसके अलावा कई ज्ञानवर्धक व्याख्यानों को सुनने और लैब विजिट का अवसर भी दर्शकों को दिया गया।अंग्रेजी के साथ-साथ हिंदी और मराठी में भी व्याख्यानों का आयोजन प्रशंषनीय है। इतना ही नहीं, दर्शकों को किसी भी प्रयोग को समझने वक्त भी भाषा को चुनने का अवसर दिया जा रहा था।
उल्लेखनीय है, भारतीय वैज्ञानिक और नोबेल पुरस्कार विजेता सर सी वी रमण ने 29 फरवरी, 1928 को रमन प्रभाव (निर्जीव वस्तुओं में प्रकाश के बिखरने सम्बन्धी) खोज की घोषणा की थी और इस महत्वपूर्ण दिन की याद में २८ फरवरी को भारत में ‘राष्ट्रीय विज्ञान दिवस’ घोषित किया गया है।

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